हमारे बारे में

सिंगरौली व इसके आस-पास स्थित सभी नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों के सामाजिक व शैक्षणिक उत्थान के लिए सन् 2002 में श्री रामलल्लू बैस जी की अध्यक्षता में स्व. बैस मायाराम शिक्षा समिति का गठन किया गया व समिति द्वारा यहाँ के छात्रों को उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध करने हेतु सन 2005 में मायाराम महाविद्यालय , मेढ़ौली – मोरवा का शुभारम्भ किआ गया। महाविद्यालय, उच्च शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा मान्यता प्राप्त है व अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय , रीवा से सम्बद्ध है। आम नागरिकों की इच्छानुसार ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित यह महाविद्यालय ग्राम – मेढ़ौली के पठारी भूमि में स्थापित है जो प्राकृतिक एवं पर्यावरणीय सम्पन्नता की धरोहर लिए मोरवा – वैढन मुख्य मार्ग पर स्थित है। मेढौली गाँव, मोरवा – पंजरेह बस्ती से लगा शहरी सभ्यता से अछूता ग्राम्य सभ्यता वाला गाँव है। जहाँ प्रचलित सुख सुविधाओं का अभाव है।

पंजरेह -मोरवा बस्ती में एन. सी. एल. का मुख्यालय होते हुए भी उच्च शिक्षा का कोई साधन उपलब्ध न होने के कारण छात्र-छात्राओं को 20-25 किलोमीटर दूर शासकीय महाविद्यालय वैढ़न या जबलपुर, भोपाल या इंदौर स्थित महाविद्यालयों में प्रवेश बहुमूल्य समय , ऊर्जा एवं धनराशि की हानि के लिए बाध्य होना पड़ता था। बच्चों की इसी असुविधा को दूर करने के लिए श्रेष्ठ, अकादमिक संस्थान में अधिक से अधिक समय का सदुपयोग करने के उद्देश्य से मायाराम महाविद्यालय की स्थापना की गई है। इस महाविद्यालय में पंजरेह, मोरवा, सिंगरौली, झिंगुरदह, मेढ़ौली, निगाही, वैढ़न, अमलोरी, दुदधीचुआ, घोरौली, विंध्यनगर, खड़िया, शक्तिनगर, संजयनगर, अम्बेडकर नगर, जयंत, गोरबी, वैढ़न, बरगवाँ, सरई ग्राम, बरका, राजमिलान, परसौना, नवानगर, अनपरा, रेनुकूट, रेनुसागर, बीना, ककरी, करेला, व चितरंगी आदि स्थान में हायर सेकेण्डरी स्कूलों से 10+2 कक्षा उत्तीर्ण छात्र व छात्रा प्रवेश लेकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।

महाविद्यालय का खेलकूद के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन रहता है। एन. सी. एल. में काम कर रहे अधिकारियों का भी सहयोग हमें मिलता रहा है, जिसके लिए पूरे महाविद्यालय परिवार उनका तहे दिल से आभारी है। महाविद्यालय परिसर क भौतिक क्षेत्रफल ऊच्च स्तरीय तकनीकी व मेडिकल शिक्षा हेतु भी पर्याप्त है। महाविद्यालयीन समिति इन पाठ्यक्रमों का संचालन यथाशीघ्र अनुदान व सहयोग के माध्यम से प्रारम्भ करने के लिये भी प्रयत्नशील है। महाविद्यालय में रेडक्रॉस सोसाइटी क गठन भी किया गया है जिसके माध्यम से विभिन्न सामजिक कार्य किये है।